नई दिल्ली। यूक्रेन व रूस की जंग में फंसे पाकिस्तानी व बंगलादेशी छात्रों ने भी तिरंगा थाम लिया। दरअसल जब पता चला कि तिरंगा लेकर चलने वालों पर रूस हमला नहीं करेगा तो उन्होंने भी भारतीय छात्रों की देखादेखी तिरंगा थाम लिया।

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से वहां से घर लौटे कासिफ हसन परिवार में हर्ष का माहौल है। हमले के बाद से ही परिवार लगातार कासिफ के संपर्क में था। बंग्लादेश और पाकिस्तान सहित अन्य देशों के लोग भी भारतीय ध्वज के सहारे ही अपनी जान बचाकर सुरक्षित यूक्रेन से निकल रहे हैं।

यूक्रेन की निप्रो पैथराक्स मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा बेहट के गांव ताजपुरा निवासी डा.सगीर हसन का बेटा कासिफ हसन शनिवार को वापस लौट आया। गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर बेटे कासिफ हसन को देखकर पिता डा. सागीर हसन और बहनोई दानिश ने भावुक होकर उसे गले लगा लिया। दोपहर बाद घर पहुंचने पर परिवार में उत्सव का माहौल बन गया। मां से लेकर बहनों व अन्य स्वजन ने कासिफ को बारी-बारी से भावुक होकर गले लगाया। कासिफ हसन ने बताया कि हमले के बाद से ही निप्रो शहर में 24 फरवरी को कर्फ्यू लग गया था। 26 फरवरी को रूस की सेना निप्रो शहर के आसपास तक पहुंचने लगी थी। इस बीच वह लोग बंकरों में ही रहे। दो मार्च को वह वहां से निकलकर रेलवे स्टेशन पहुंचे, उन्हें स्लोवाकिया बार्डर पर पहुंचने के लिए कहा गया था। उन्होंने बताया कि स्लोवाकिया में माइनस छह डिग्री तापमान होने के कारण बेहद ठंड थी। बार्डर पर छह घंटे तक इंतजार करते रहे। इसके बाद भारतीय दूतावास से संपर्क करने पर उन्हें बार्डर से एक बस द्वारा होटल पहुंचाया गया। यहां से उन्होंने चार मार्च को भारतीय वायुसेना के विमान से उड़ान भरी और हिंडन एयरबेस पहुंचे।

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By editor1

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