मतगणना से पहले बना रहे सरकार, हालांकि चुनाव परिणाम आने में अभी चंद घंटों की देरी है, लेकिन प्रदेश भर में तमाम चौराहों व चौपलों के अलावा घर दफ्तार में हो रही चाय के साथ चुस्की वाली बैठकों में सरकार को गठन चल रहा है। तमाम तरह की बातें चाय की चुस्की वाली इन बैठकों में निकलकर सामने आ रही हैं। कुछ एग्जिटपोल पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। रालोद व सपा गठबंधन के समर्थकों के अपने दावे हैं तो भगवा खेमे में शुमार होने वाली एक बार फिर भाजपा सरकार का नारा बुलंद कर रहे हैं।  विधानसभा चुनाव के 7वें चरण का मतदान संपन्न होने के बाद गत दिवस जैसे ही विभिन्न एजेंसियों के एक्जिट पोल आया वैसे ही सियासी खलबली मची है। भाजपा सरकार बनती दिखाई देने से भाजपाइयों के चेहरे खिल उठे तो विपक्षी सहमे हैं। इसके बावजूद पक्ष-विपक्ष को बेसब्री से 10 मार्च का इंतजार है, क्योंकि असल परिणाम तो मतगणना से ही आएगा। विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में 10 फरवरी को बागपत, छपरौली व बड़ौत विधानसभा सीटों के लिए मतदान हुआ। एक माह से लोग परिणाम जानने को बेताब रहे। जैसे ही एक्जिट पोल आया वैसे ही गांव से लेकर शहरों तक और चौपाल से लेकर घरों के चूल्हों तक चुनावी चर्चा तेज हो गई। क्या महिला, क्या पुरुष और क्या बुजुर्ग यानी हर कोई विधानसभा चुनावों को लेकर एक्जिट पोल पर मंथन करते दिखा। एक्जिट पोल में पलड़ा भारी देख भाजपाइयों और समर्थक गदगद हैं, लेकिन विपक्षी खेमे में खलबली है। उनकी तो कुछ पूछिए ही नहीं, जो प्रत्याशी कल तक जीत पक्की मान रहे थे, अब वो समर्थकों को फोन कर पूछते रहे कि हम जीत तो रहे हैं ना…।  एक्जिट पोल जिनको पक्ष में लग रहा है, वो इंटरनेट मीडिया पर बागपत की तीनों सीटों से अपने प्रत्याशियों को थोक वोट देकर विधानसभा में भेजने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बागपत के राष्ट्रवंदना चौक के पास हुक्का गुडग़ुड़ा रहे कुछ किसानों को भी एक्जिट पोल पर चर्चा करते देखा। इंद्रपाल कहने लगे कि म्हारी कुछ समझ में नहीं आ रहा एक्जिट पोल का चक्कर। बीच में बात काटते हुए दूसरे किसान बोला कि भाई क्यों परेशान हो रहे हो… एक ही दिन बाकी है मतगणना में। दस मार्च को सबकुछ साफ हो जाएगा। रामबीर बोले कि अबकी बार चुनाव बड़ा कांटे का रहा है। तीनों सीटों पर बिल्कुल सीधा मुकाबला है।

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By editor1

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