कैंट बोर्ड पर कस सकता है सीबीआई का शिकंजा

कैंट बोर्ड पर कस सकता है सीबीआई का शिकंजा, कैंट बोर्ड पर एक बार फिर सीबीआई का शिकंजा कस सकता है। पहले  भी करीब दो बार कैंट बोर्ड के अफसरों व स्टाफ पर शिकंजा कस चुकी है। एक बार योगेश यादव के रिश्वत प्रकरण के चलते जिसमें उन्हें लंबे वक्त तक जेल में रहना पड़ा था और दूसरी बार कैंटोनमेंट हास्पिटल के दवा घोटाले के चलते हॉस्पिटल के स्टाफ समेत कैंट बोर्ड के आफिस सुप्रीटेंडेंट समेत कई अन्य सीबीआई की जांच की चपेट में आ चुके हैं। दवा घोटाले में भी कई जेल की हवा खा चुके हैं। लेकिन इस बार खतरा बड़ा नजर आ रहा है। भंग कैंट बोर्ड के एक मात्र सदस्य डा. सतीश शर्मा डोर टू डोर ठेके के भुगतान को लेकर जो आरोप सेनेट्री सेक्टशन के इंस्पेक्टर योगेश यादव द्वारा लगाए गए हैं उनकी जांच सीबीआई से कराने के पक्षधर हैं। उन्होंने बताया कि आज कल में डिफेंस मिनिस्ट्री से जो भी फौजी अफसर यहां इस मामले की जांच के लिए भेजे जाएंगे उनके सम्मुख इस मामले की सीबीआई से जांच कराए जाने का आग्रह किया जाएगा। जानकारों का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो एक बार फिर कैंट बोर्ड पर सीबीआई का शिकंजा कसना तय है। सीबीआई की जांच को लेकर अभी कन्फर्म कुछ नहीं लेकिन कैंट बोर्ड स्टाफ की हवाई जरूर उड़ी हुई हैं।

खुल सकते हैं कुछ अन्य मामले:

कैंट बोर्ड का इन दिनों राहु काल चल रहा लगता है। जानकारों का मानना है कि योगेश यादव के आरोपों की जांच के लिए डिफेंस मिनिस्ट्री की ओर से जो भी अफसर यहां पहुंचेगे उनके समक्ष कुछ अन्य मामले भी यहां उठाए जा सकते हैं। इनमें दुकानाें व खोखों के रिन्युअल के नाम पर चार से पांच लाख तक की डिमांड किए जाने जैसे गंभीर आरोप हैं। आबूलेन की कुछ दुकानों में बेसमेंट को लेकर भी कैंट बोर्ड का स्टाफ जांच में फंस सकता है। नियमानुसार इन इलाकों में दुकानों में बेसमेंट की इजाजत नहीं है।

सीईओ को मिली सुरक्षा:

योगेन्द्र यादव के आरोप और भाजपा के विरोध के एलान के बाद आरोपों से घिरे सीईओ कैंट को सीएमपी की सुरक्षा मुहैय्या करा दी गयी है। यह भी सुनने में आया कि बजाए कार्यालय के ज्यादातर कामकाज मसलन फाइलें बंगले पर ही तलब की जा रही हैं।

नयी बुलेरो पर भी सवाल:

कैंट बोर्ड प्रशासन द्वारा स्क्रेप बेचकर नयी बुलेरो खरीदे जाने को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कैंट बोर्ड की माली हालत किसी से छिपी नहीं है। वाहनों से एंट्री फीस की वसूली पर रोक के बाद सेलरी जुटाना भी मुश्किल होता है। ऐसे में स्क्रेप बेचकर बुलेरो खरीदने के फैसले पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सवाल उठाने वालों का कहना है कि सीईओ के लिए पहले से सरकारी गाड़ी के अलावा दो अन्य जीप मौजूद हैं। ऐसे में बुलेरो का खरीदा जाना सवाल तो पूछा जाएगा।।

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By editor1

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