सीएम की प्राथमिकता और निर्मम निगम अफसर

सीएम की प्राथमिकता और निर्मम निगम अफसर, गोवंश विशेषकर निराश्रित गोवंशों की देखभाल प्रदेश की सीएम योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता वाले कार्यों की सूची में हैं। लेकिन नगर निगम मेरठ के टॉप अफसरों को रवैये से लगता है कि सीएम की प्राथमिकता वाले निराश्रित गाेवंश को लेकर वह कतई गंभीर नहीं। निगम द्वारा संचालित की जा रही गोशालाओं में जिन गोवंश की किन्हीं कारणाें से मौत हो रही हैं, उनके अंतिम संस्कार जो प्रक्रिया निगम अपना रहा है, वह न केवल शर्मनाक है, बल्कि गोवंश को पूजनीय मानने वालों की भावनाओं काे भी आहत करने वाली है। देश का एक बड़ा वर्ग गोवंश की पूजा करता है। गोवंश को पूजनीय मानता है। गोवंश से अनेक लोगों की आस्था जुड़ी है, लेकिन निगम प्रशासन की नाक के नीचे जिस निर्मम तरीके से मृत गोवंश का अंतिम संस्कार किया जा रहा है, वह सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं किया जा सकता। नगर निगम मेरठ में यह सब शर्मनाक कार्य तब किया जा रहा है जब कि पूरा प्रदेश यहां तक की प्रदेश भर के टाप लेबल अफसर यह जानते हैं कि निराश्रित गोवंशों की देखभाल सीएम योगी की प्राथमिकता वाला विषय है। गोशालाओं के लिए प्रदेश सरकार की ओर से एक भारी भरकम रकम नगर निगमों को दी जा रही है ताकि जो निराश्रित गोवंश सड़क पर बेसहारा होकर घूमते हैं, उन्हें आसरा दिया जा सके। इसके लिए सीएम ने प्रदेश भर में गोवंश के इलाज व घायल गोवंश को लाने ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक की व्यवस्था की हैं, लेकिन लगता है कि नगर निगम मेरठ को इन तमाम बातों से कोई सरोकार नहीं हैं। गोशाला में जिन गोवंश की मौत हो रही है, उनकाे अंतिम संस्कार बजाए उचित सम्मान से किए जाने के ऐसे गाेवंश के शव कूडा गाड़ियों में लादकर उन्हें डंपिंग ग्राउंड पर पहुंचा जाता है। वहां का दृश्य बेहद विदर्ण करने वाला है। इन गोवंश के शव को रस्से से खींचकर डंपिंग ग्राउंड में जेसीबी की मदद से बनाए जाने वाले गहरे गड्ढों में डालकर उनके शव पर कूडा व गंदगी डालकर उन्हें दबा दिया जाता है। यह सब निगम अफसरों की नाक के नीचे किया जा रहा है। इससे भी दुखद यह कि जो भी निगम की इस कारगुजारी को उजागर करने का प्रयास करता है उनका मुंह बंद करने के लिए धमकाया जाता है।

पीएम ने लिया है संज्ञान-सांसद राजेन्द्र अग्रवाल: मेरठ हापुड़ लोकसभा से सांसद राजेन्द्र अग्रवाल का कहना है कि गाेवंश के अंतिम संस्कार में निगम प्रशसन जिस प्रकार से निर्मम बना है, वह उचित नहीं। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की पीएम मोदी ने भी इसका संज्ञान लिया है। वह इसको लेकर गंभीर है। मेरठ निगम में जो हो रहा है, उसको लेकर सीएम से भी बात की जाएगी। यह उचित नहीं, चीजों को ठीक कराया जाएगा।

भूख से मौत या कुछ और: निगम द्वारा संचालित गोशाला में जिन गोवंश की मौत हो रही है उनको लेकर भी सवाल पूछे जा रहे हैं। महत्वपूर्ण यह है कि यह सवाल बाइनाकुलर मीडिया ग्रुप नहीं पूछ रहा है, बल्कि नगर निगम मेरठ के पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी पूछ रहे हैं। पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह ने गोवंश की मौत के पीछे वजह भूख बतायी है। उन्होंने बताया कि गोवंश की मौतों की जांच के लिए उन्होंने मंडलायुक्त व जिलाधिकारी को पत्र भी लिखा है। डा. प्रेम सिंह ने भी मृत गाेवंश के अंतिम संस्कार पर घोर आपत्ति की है। अब सवाल उठता है कि गोवंश को लेकर सवाल उठाने वाले पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी का भी निगम प्रशासन मुंह बंद करने के लिए पुलिस कार्रवाई करेगा। पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने इस पूरे प्रकरण में गोशाला के नोडल अफसर की भी भूमिका की अलग से निष्पक्ष जांच कराए जाने की बात कही है ताकि यह सारी कारगुजारी सामने आ सके। इतना ही नहीं उन्होंने यहां तक कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें विभागीय जांच भी शुरू करायी जानी चाहिए। उन्होंने मामले की शिकायत पीएमओ तक पहुंचाने की बात कही है।

हाईकोर्ट में गूंजेगा मौत का मामला: आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना गोवंश की मौत व उनके निर्मम अंतिम संस्कार का मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में लाएंगे, ताकि इस शर्मनाक व गोवंश को पूजनीय मानने वालों की भावनाओं का आहत करने वाले निगम अफसरों की जिम्मेदारी तय की जा सके, उनके खिलाफ उचित व कठोर कार्रवाई की जा सके। यहां भी सवाल पूछा जा रहा है कि क्या अब आरटीआई एक्टिविस्ट का मुंह बंद रखने के लिए भी उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जाएगी।

पार्षद उठा चुके हैं मामला: नगर निगम के सदन में अब्दुल गफ्फार सरीखे पार्षद गोवंश के निर्मम अंतिम संस्कार का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठा चुके हैं। बाइनाकुलर मीडिया द्वारा विगत दिनों गोवंश को लेकर चलाए गए समाचार की सराहना करते हुए अब्दुल गफ्फार ने निगम प्रशासन की तीखी आलोचना की। साथ ही उन्होंने मृतक गोवंश के अंतिम संस्कार पूरे सम्मान से कराए जाने का आग्रह निगम प्रशासन से किया है। तो क्या इस बात के लिए पार्षद को भी पुलिस कार्रवाई के लिए धमकाया जाएगा।

गोसेवा आयोग में मामला: मृत गोवंशाें के साथ निगम के निर्मम व्यवहार का मामला प्रदेश के गाे सेवा आयोग के अध्यक्ष तक भी पहुंचा दिया गया है। आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने जानकारी दी कि उन्होंने स्वयं निगम प्रशासन की इस प्रकार की कारगुजारिया गोसेवा आयोग के अध्यक्ष के संज्ञान में ठोस साक्ष्य के साथ पहुंचायीं। आयोग के अध्यक्ष ने इसको बेहद गंभीर भी माना साथ ही कार्रवाई की भी बात कही।

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By editor1

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