cyber crime against children, सीसीएसयू के विधि अध्ययन सस्थान में गुरूवार को  cyber crime against children विषय पर निबन्ध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्घाटन संस्थान के समन्वयक डा. विवेक कुमार ने किया। कार्यक्रम के संयोजक डा. कुसुमावती व श्रीमति सुदेशना ने प्रतिभागियों को नियमों से अवगत कराते हुये कार्यक्रम का संचालन किया।  विधि अध्ययन संस्थान के समन्वयक डा. विवेक कुमार ने साइबर क्राइम अगेस्ट चिल्ड्रन के विभिन्न पहलूओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल हो रही है लोगों की निर्भरता इंटरनेट पर अधिक बढ़ रही है। आज के समय में लोगों के फोन में ही सारी दुनिया समा गई है। एक समय था जब बच्चों को मोबाइल और इंटरनेट से दूर रहने के लिए डांट पड़ती थी लेकिन वर्ष 2020 में कोरोना के दौर में मोबाइल और इंटरनेट ही बच्चों की पढ़ाई के लिए सबसे बड़े माध्यम बने। क्योंकि बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन हो गई थी, जाहिर सी बात है कि ऑनलाइन एजुकेशन होने की वजह से बच्चों का समय इंटरनेट पर ज्यादा गुजर रहा है। समन्वयक ने इस विषय के बारे मे भी जानकारी दी कि अधिकतम व्यक्ति सोशल मिडिया मे सक्रिय है तो यह सोशल मिडिया प्लेटफार्म अपराधियों के लिए भी एक उर्वरक भूमि है जिसमें वे आसानी से बालक एवं बालिकाओं को उत्पीडित व अन्य प्रकार के अपराधो का शिकार बना लेते है। बच्चों के खिलाफ बढ़ता साइबर अपराध देश ही नही अपितु विश्व के सम्मुख एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। विश्व के विकसित एवं विकासशील देशो मे चाइल्ड पौनोग्राफी एक बडी सामाजिक बुराई बनकर उभरी है। जिससे लडने के लिए सम्पूर्ण विश्व की विधिक व्यस्थाओं ने इसको गम्भीरता से लेते हुए कठोर दण्ड का विधान किया है या करने जा रहे हैै। साइबर स्पेस के बढते प्रभाव से मनोवैज्ञानिक दुस्प्रभाव भी पड रहे है जिससे युवा पीडी को सचेत रहने कि आवश्यकता हैं। कार्यक्रम मे डा. विकास कुमार, आशीष कौशिक, अपेक्षा चौधरी, मोनीका, डा.धनपाल, डा. सुशील कुमार शर्मा, डा. महिपाल, डा. मीनाक्षी आदि उपस्थिति रहे। निबन्ध प्रतियोगिता में बी0ए0एलएल-बी0 के कुल 14 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। जिसमे प्रथम स्थान जानवी शर्मा, द्वितीय स्थान ज्योति शर्मा और तृतीय स्थान पर विश्वनी चौधरी ने प्राप्त किया।

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By editor1

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