डीन बनने के लिए कराया हमला

डीन बनने के लिए कराया हमला, हमला कराने वाली महिला प्रोफेसर फरार, कृषि विश्वविद्यालय की डीन बनने की लालसा में महिला प्रोफेसर ने कुख्यात उधम सिंह के शूटरों को पांच लाख की सुपारी देकर हमला कराया था। पुलिस ने तीश शूटर दबोच भी लिए। वारदात का सोमवार को खुलासा कर दिया गया। एसएसपी प्रभाकर चौधरी खुद इस मामले की लगातार अपडेट ले रहे थे। एसपी क्राइम अनित कुमार व एसपी देहात के कुशल निर्देशन में सीओ दौराला के नेतृत्व में वारदात का खुलासा कर दिया गया।  11 मार्च को शाम के वक्त

सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रोधौगिकी विश्व विद्यालय के पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय के डीन डा0 राजवीर सिंह पर हत्या करने के लिये ताबडतोड गोलियां चला दी गयी थीं। वह गंभीर रूप से घालय हो गए थे। उनके पुत्र  डाक्टर भानू प्रताप  निवासी बी-68 डिफेन्स एन्कलेव थाना कंकरखेडा  द्वारा थाना दौराला पर  अज्ञात पंजीकृत कराया गया । इस मामले में पुलिस विवेचना में  डा. आरती भटेले, अनिल बालियान,  मुनेन्द्र बाना, आशू चड्डा, 5. नदीम के नाम प्रकाश में आये। मुखबिर की सूचना पर सोमवार तडके कृषि विश्वविद्यालय वाले रास्ते पर गंदे नाले की पुलिया के पास ग्राम पबरसा रोड से गोली चलाने वाला शूटर आशू चड्डा को घटना में प्रयुक्त तमंचा 315 बोर मय दो कारतूस व एक पिस्टल .30 बोर मय 9 मैगजीन मय 63 कारतूस .30 बोर व मो0सा0 स्पलेन्डर व सुपारी की रकम 4 लाख रूपयो के साथ तथा हत्या के षड्यन्त्र में शामिल अभियुक्त मुनेन्द्र बाना मय गाडी स्कार्पियो जिससे घटना से पूर्व रेकी की गयी थी व हत्या का प्रयास कराने वाला अनिल बालियान द्वारा चार लाख रूपये शूटर आशू चड्डा व मध्यस्थता कराने वाले मुनेन्द्र बाना को गिरफ्तार किया। पूछताछ में

अभियुक्त अनिल बालियान ने पूछताछ पर बताया कि वर्ष 2014 में मैने अपनी बेटी कु0 आकांक्षा बालियान का एडमिशन B.Sc A.G. मे सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्व विद्यालय मोदीपुरम मे कराया था । डा0 आरती भटेले से तभी से जान पहचान हो गयी थी और हमारे सम्बन्ध काफी घनिष्ठ हो गये थे जिस कारण मेरी पत्नी वर्ष 2019 मे मुझे छोडकर गाँव सिसौली चली गयी । मेरा बड़ा लडका बैंगलोर मे नौकरी करता हैं तथा छोटा लड़का देहरादून मे पढाई करता हैं । मैं अपने फ्लैट पर अकेला रहता हूँ, अक्सर मेरे घर पर डा0 आरती भटेले आती रहती है और हम दोनो अक्सर बाजार से खरीदारी करने व घूमने फिरने साथ-साथ जाते है । डा0 राजबीर सिंह वैटनेरी मे डीन है । जबकि डा0 राजबीर सिंह की योग्यता डीन बनने लायक नही है । डा0 आरती भटेले वैटनेरी से P.hD है । डीन बनने की योग्यता रखती है । जान बूझकर डा0 आरती भटेले को डीन नही बनाया गया । इस सम्बन्ध मे डा0 आरती भटेले के साथ मैं दो वर्ष पूर्व लखनऊ महामहिम राज्यपाल के यहा शिकायत करने भी गया था और काफी पत्राचार किया गया है । मुझे डा0 आरती भटेले ने कहा यदि डा0 राजबीर सिंह रास्ते से हट जाये तो मैं डीन बन जाऊंगी तो मेरी इज्जत बढ जायेगी और आपकी लडकी कु0 आकांक्षा की नौकरी कृषि विश्वविद्यालय में लगवा दूंगी । इस लालच में मैंने अपने दोस्त मुनेन्द्र बाना से 25 फरवरी को सम्पर्क किया था।  और कहा था कि डा0 राजवीर सिंह को रास्ते से हटाना हैं तो इसने कहा कि मेरा फुफेरा साला आशू चड्डा 09 फरवरी को जेल से बाहर आया है ।  मुनेन्द्र बाना के घर पर हम लोगो की मीटिंग हुई जिसमे मैं व मुनेन्द्र बाना व आशू चड्डा व आशू चड्डा का दोस्त नदीम हम चारो लोगो ने डा0 राजबीर सिंह की हत्या के षडयंत्र की योजना बनायी थी तथा मुनेन्द्र बाना व आशू चड्डा व नदीम से डा0 राजवीर सिंह को हटाने के कारण भी बताये थे।  7 मार्च को मैंने व मुनेन्द्र बाना ने मुनेन्द्र बाना की स्कार्पियो गाडी मय आशू चड्डा व नदीम को गाडी मे बैठाकर डा0 राजवीर सिंह के घर से लेकर कृषि विश्व विद्यालय तक की रेकी करायी व गाडी नम्बर नोट कराया व डा0 राजबीर सिंह का फोटो दिया था रेकी वाले दिन ही मैने अपनी लाईसेन्सी पिस्टल .30 बोर व 9 मैगजीन जिनमे 07-07 राउण्ड भरे हुए थे आशू चड्डा को दिये और कहा कि डा0 राजबीर सिंह को मारने की घटना के समय आपके अस्लाह काम नही करे तो मेरा यह पिस्टल प्रयोग कर लेना यह बहुंत अच्छा पिस्टल है । एक लाख रुपये कैश दिये थे तथा 04 लाख रुपये काम होने के बाद देने को मैने कहा और ये लोग सभी चले गये और मैं अपने फ्लैट मे आ गया । 11 मार्च को मैंने डा0 आरती भटेले को वाट्सअप काल करके अपने पास बुलाया डा0 आरती भटेले अपनी गाडी से समय करीब 15.30 बजे मेरी कालोनी मे आयी और डा0 भटेले की गाडी कालोनी मे खड़ी करके मैं व डा0 आरती भटेले मेरी गाडी से बाजार से खरीदारी करने के लिए जानबूझकर गये की हम दोनो घटना के समय कैमरो के सामने रहेगें किसी को हम पर कोई शक न हो । हम दोनो शॉप्रिक्स माल गये फिर सदर बाजार गये रात्रि 20.30 बजे के करीब वापस आये और हम दोनो ने कहा कि अब एक दूसरे को कॉल नही करेगे । जो भी कॉल करेगे वाट्सअप कॉल करेगे और आपस में नही मिलेगे । इसके बाद डा0 आरती भटेले कैम्पस में चली गयी । आज मैं मुनेन्द्र बाना के साथ शेष बचे 04 लाख रुपये लेकर आशू चड्डा को देने के लिए व अपना पिस्टल व मैंगजीन कारतूस वापस लेने व डा0 आरती भटेले से आगे की रणनीति तय करने के लिए इधर आया था जो पुलिस ने मुझे यहाँ मुनेन्द्र व आशू चड्डा के साथ पकड़ लिया । मेरे डा0 आरती भटेले से सम्बन्ध है इन सम्बन्धो के कारण मैं डा0 आरती भटेल के बहकावे व लालच में आ गया था कि डा0 राजबीर सिंह की हत्या होने के बाद डा0 आरती भटेले, डीन बन जायेगी और मेरी लड़की आकांक्षा की नौकरी लग जायेगी और मेरे आरती भटेले से सम्बन्ध बने रहेगे । अभि0 आशू चड्डा व नदीम ने मो0सा0 से डीन डा0 राजवीर सिंह की गाडी के आगे अपनी मो0सा0 लगाकर तमंचे व पिस्टल से जान से मारने की नीयत से डा0 राजवीर सिंह ऊपर फायर किये थे ।  नदीम चला रहा था व आशू चड्डा पीछे बैठा था । इस मामले में अनिल, मुनेन्द्र व आशू को गिरफ्तार कर लिया गया है। डा. आरती व नदीम फरार हैं। उनकी तलाश की जा रही है। @Back To Home

 

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By editor1

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