गन्ना बैल्ट की लीड बनेगी सिरमोर

तीन सीटोंपर सीधी टक्कर, यूपी की इन तीन सीटों पर योगी के मंत्रियों और विपक्षी नेताओं के बीच कांटे की टक्कर है। जहां मेरठ में हस्तिनापुर से भाजपा प्रत्याशी दिनेश खटीक और गठबंधन प्रत्याशी योगेश वर्मा के बीच सीधा मुकाबला तो वहीं शामली की थाना भवन सीट पर मंत्री सुरेश राणा और  गठबंधन के अशरफ अली खान में कांटे की टक्कर है। उधर, मुजफ्फरनगर की शहर सीट पर मंत्री कपिल देव अग्रवाल और गठबंधन के सौरभ के बीच बड़ी टक्कर है। पश्चिमी यूपी की तीन विधानसभाओं पर मंत्रियों और विपक्षी नेताओं के बीच कांटे की टक्कर है। मेरठ में हस्तिनापुर सीट से जल शक्ति और बाढ़ नियंत्रण मंत्री दिनेश खटीक और गठबंधन प्रत्याशी योगेश वर्मा के बीच बड़ा मुकाबला है।वहीं शामली की थाना भवन सीट पर गन्ना मंत्री सुरेश राणा और रालोद-सपा गठबंधन से अशरफ अली खान में सीधा मुकाबला है। उधर, मुजफ्फरनगर की शहर सीट पर भाजपा प्रत्याशी व राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल और गठबंधन के सौरभ के बीच दिलचस्प मुकाबला बताया जा रहा है। @Back to Home

गन्ना मंत्री सुरेश राणा का बड़ा इम्तिहान
यह चुनाव गन्ना मंत्री सुरेश राणा के लिए एक इम्तिहान है। रालोद-सपा गठबंधन ने अशरफ अली खान, बसपा ने जहीर मलिक, कांग्रेस ने सत्यम सैनी और आम आदमी पार्टी ने अरविंद देशवाल को मैदान में उतारा है।

सुरेश राणा और अशरफ अली खान इससे पहले 2012 के चुनाव में भी आमने-सामने थे। तब दोनों के बीच कांटे मुकाबला हुआ था और महज 265 वोटों के अंतर से सुरेश राणा ने जीत दर्ज की थी। सुरेश राणा को 53,719 वोट मिले थे। उस समय दो मुस्लिम प्रत्याशियों में रालोद के अशरफ अली को 53,454 और बसपा के अब्दुल वारिस को 50 हजार वोट मिले थी। 2017 में सुरेश राणा ने फिर जीत दर्ज की थी।

जातीय समीकरणों में उम्मीदवारों के फिट बैठने की चुनौती
थानाभवन सीट ऐसी है कि जहां जातीय समीकरण सभी दलों का इम्तिहान लेते हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या यहां करीब 98 हजार है। अन्य जातियों में अनुसूचित जातियां करीब 60 हजार, जाट 40 हजार, सैनी 35 हजार, कश्यप 30 हजार, ठाकुर 22 हजार, ब्राह्मण 14 हजार, वैश्य 10 हजार, अन्य मतदाता 18 हजार हैं। इस सीट के जातिगत समीकरण की बदौलत मुस्लिम, वैश्य, ठाकुर, सैनी, कश्यप भी विधायक बन चुके हैं।

मुजफ्फरनगर सीट
मुजफ्फरनगर शहर सीट भाजपा की सबसे मजबूत सीट मानी जाती है। लेकिन इस बार शहर सीट यहां रालोद प्रत्याशी से कांटे के मुकाबले में फंस गई है। भाजपा का भीतरघात आश्चर्यजनक परिणाम सामने ला सकता है। कांग्रेस और बसपा प्रत्याशी को मिलने वाले वोट भी यहां हार-जीत में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के कपिलदेव अग्रवाल यहां सपा के गौरव स्वरूप से जीते थे। इस बार फिर से राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल मैदान में है। कपिलदेव का चितरंजन स्वरूप के परिवार से चौथा मुकाबला है। इस बार रालोद प्रत्याशी के रूप में सौरभ स्वरूप मैदान में है। सौरभ ने कपिल को चुनाव में कड़ी चुनौती दी है। सौरभ को इस चुनाव में कपिल के अंदरूनी विरोध का लाभ मिलता दिखाई दे रहा है। इस सीट पर 3,56,283 वोट है, जिनमें से 2,21,982 ने अपने मत का प्रयोग किया है। हार-जीत एक लाख के लगभग ही होगी। चुनाव में बीजेपी और रालोद के बीच कांटे का मुकाबला रहा है। भाजपा का भीतरघात इस चुनाव में आश्चर्यजनक परिणाम दे सकता है। इसी के साथ बसपा के पुष्पांकर पाल और कांग्रेस के सुबोध शर्मा को मिलने वाले वोट भी हार-जीत में बड़ी भूमिका निभायेंगे। भाजपा और रालोद की हार-जीत को लेकर राजनीतिक विश्लेषक अपने समीकरण जोड़ने में लगे हैं।

हस्तिनापुर सीट
मेरठ जनपद में हस्तिनापुर विधानसभा सीट का अपना इतिहास है। अभी तक इस क्षेत्र की जनता ने जिस पार्टी के उम्मीदवार को विधायक चुना उसी पार्टी की सरकार प्रदेश में आती है। 2017 में भाजपा उम्मीदवार दिनेश खटीक ने चुनावी मैदान में बाजी मारी थी। इस बार भी हस्तिनापुर सीट पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

अब सवाल है कि योगी सरकार में जल शक्ति और बाढ़ नियंत्रण मंत्री दिनेश खटीक क्या इस बार भी इतिहास को कायम रखने में कामयाब होंगे। क्योंकि इस सीट पर गठबंधन प्रत्याशी व पूर्व विधायक योगेश वर्मा भी चुनाव लड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि इन दोनों के बीच कांटे का मुकाबला है। अब यह तो परिणाम आने के बाद ही साफ होगा कि इतिहास कायम रहेगा या फिर योगेश वर्मा अब तक के इतिहास का रिकॉर्ड तोड़कर नया इतिहास बनाने में कामयाब होंगे।

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By editor1

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