घमासान-लल्लू-नवजोत-गोदियाल का इस्तीफा

घमासान-लल्लू-नवजोत-गोदियाल का इस्तीफा, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में मारकाट सरीखी स्थिति बनी है। सीडब्लूसी की बैठक के बाद संगठन की कार्यवाहक अध्यक्ष सोनिया गांधी एक्शन मोड में हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सूपडा साफ होने के बाद संबंधित सभी राज्यों के अध्यक्षों के इस्तीफे मांगे जाने के बाद इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया है। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय लल्लू, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू व उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के इस्तीफे सोनिया गांधी तक पहुंच चुके हैं, लेकिन सवाल भी पूछा जा रहा है कि क्या केवल हार वाले राज्यों के अध्यक्ष के ही इस्तीफे लिए जाएंगे या फिर उन राज्यों के प्रभारियों के भी इस्तीफे मांगे जाएंगे। भले ही कांग्रेसी खुलकर न बोल रहे हों, लेकिन यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से केवल दो सीटें हासिल करने के बाद प्रियंका गांधी एंड कंपनी पर भी कुछ सीनियर कांग्रेसी सवाल उठा रहे हैं। नाम न छापे जाने की शर्त पर एक कांग्रेसी नेता ने पूछा कि क्या खुद को टीम प्रियंका का पार्ट बता कर सीनियर पर रौब गालिब करने वालों के इस्तीफे नहीं लिए जाने चाहिए। पूरे यूपी में विधानसभा वार जो चुनाव प्रभारी बनाए गए थे क्या उनके इस्तीफे नहीं लिए जाने चाहिए। इसमें कोई दो राय नहीं कि अजय लल्लू सरीखे पदाधिकारियों की मेहनत में कोई कमी नहीं थी, लेकिन चुनाव में खासतौर से मेरठ के परिपेक्ष्य में यदि बात की जाए तो यहां केवल संगठन के नाम पर पार्टी के कार्यक्रमों में अध्यक्ष व उनकी करीबी मंडली नजर आती थी। मेरठ में करीब सौ वार्ड हैं, पार्टी कार्यालय पर होने वाले कार्यक्रमों में क्या कभी सौ कांग्रेसी जमा हुए हैं। कई बार हालत यह होती थी कि ऊंगलियों पर गिनने लायक कांग्रेसी ही जुटते थे। जब स्थानीय स्तर पर संगठन की ऐसी दयनीय हालत होगी तो फिर आलाकमान कैसे चुनाव में जीत का सपना देख सकता है। जिस भाजपा से मुकाबले की बात कांग्रेस आला कमान करता है, क्या कभी संगठन को उस स्तर पर ले जाने का प्रयास किया। कांग्रेस की यदि बात की जाए तो यहां तो संगठन में अंदरूनी स्तर पर बगैर पैसे कोई बात ही नहीं करता। जरूरी है कि ये तमाम खामियां आला कमान तक पहुंचायी जाएं। @Back To Home

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By editor1

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