जानिए लट्ठमार होली का इतिहास

जानिए लट्ठमार होली का इतिहास,होली का त्योहार हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण और उमंग से भरा होता है. फाल्गुन माह में आने वाला यह त्योहार रंगो और फूलों के बिना अधूरा है. मथुरा और ब्रज में होली का त्योहार एक अलग ही ढंग से मनाया जाता है. वहां पर कभी लट्ठमार होली से अपना प्यार दिखाते हैं तो कभी फूलों की होली से अपनी खुशी को दर्शाते हैं. बरसाने की लट्ठमार होली देखने के लिए दूर-दूर से लोग जाते हैं और होली (Holi 2022) का हिस्सा बनते हैं. ऐसे में जानते हैं कि लट्ठमार होली कब है और इसका क्या महत्व है.

लट्ठमार होली कब है?

बरसाने में लट्ठमार होली फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को खेली जाती है. जबकि नंद गांव में फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को लठमार होली मनाई जाती है जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है इस होली में गोपियां हुरयारों का लट्ठ और गुलाल दोनों से स्वागत करती हैं. इस साल बरसाने की लट्ठमार होली आज यानी 11 मार्च को खेली जा रही है. जानिए लट्ठमार होली का इतिहास, वहीं नंदगांव की लट्ठमार होली 12 मार्च दिन शनिवार को खेली जाएगी. यह होली बरसाने की लाडली जी के मंदिर में खेली जाती है. इसके लिए निमंत्रण नंदगांव के नंद महल जाता है. निमंत्रण का स्वीकृति का संदेश शाम के समय लाडली जी के मंदिर जाएगा और फिर नंद गांव के हुरयारे बरसाने होली खेलने जाते हैं.

लट्ठमार होली का महत्व

कहते हैं श्री कृष्ण और उनके मित्र द्वापर युग में कई लीलाओं के लिए प्रसिद्ध थे. बाल्यकाल में राधा और गोपियों के साथ अनेक लीलाएं करते थे. ऐसे में जब भी वे राधा और गोपियों के साथ होली खेलने जाते थे तो उसने उन्हें काफी तंग भी किया करते थे इसीलिए राधा जी और गोपियां डंडा लेकर श्री कृष्ण और ग्वालों के पीछे दौड़ती थीं. चूंकि उनका स्वागत रंग और डंडों से किया जाता था इसलिए तभी से लट्ठमार होली खेलने की यह परंपरा चली आ रही है. @Back To Home

 

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By editor1

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