जो बनी हैं महिलाओं की आदर्श

जो बनी हैं महिलाओं की आदर्श

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस यानी 8 मार्च को हम उन महिलाओं की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने सभी बाधाओं को लांघकर अपनी पहचान बनाई। किसी के घर वालों से लोग कहते थे कि इतने पैसे पढ़ाई पर खर्चा मत करो, इतने में बेटी की शादी कर देना।

मगर, सच्चाई यह है की छात्राओं को आज भी परिवार द्वारा यह समझा जाता है कि वह गांव से बाहर कैसे पढ़ाई करने जाएगी। लॉ की पढ़ाई कर ली, तो कचहरी का माहौल अच्छा नहीं है। वकालत करने पर भी पाबंदी लगाई गई।

इन पांच महिलाओं की कहानी कुछ कुछ ऐसी है, जिन्होंने ठान लिया था की जब तक सफलता नहीं मिलेगी न तो पीछे मुड़कर देखा जाएगा और न ही हार माननी मंजूर। पढ़िए दैनिक भास्कर की खास रिपोर्ट में न्यायिक अधिकारी से लेकर IPS की कहानी, उन्हीं की जुबानी…

1. पूनम के IPS बनने की कहानी

जिस जिले में पोस्टिंग मिली, वहीं लड़कियों को जागरूक किया…

पूनम सोनीपत की रहने वाली हैं और 2010 बैच की IPS अधिकारी हैं। प्रदेश के कई जिलों में तैनात रह चुकी हैं और इस समय यूपी के अमरोहा जिले में बतौर SSP तैनात हैं। पिता महावीर सिंह शुगर मिल में काम करते थे। परिवार का बोझ भी पिता के कंधों पर था। पूनम जब 11 साल की थी, तो सिर से पिता का साया उठ गया। मम्मी सुरेश पर परिवार की जिम्मेदारी का बोझ आ पड़ा। बड़े भाई जगदीश जब बड़े होने लगे, तो वह भी परिवार को संभालने में लग गए।

हेमलता के न्यायिक अधिकारी बनने का सफर

पापा और भाई को SDM ने उठवाया, तब जज बनने का फैसला किया

हापुड़ जिले से 12 किमी की दूरी पर बसे उपेड़ा गांव में किसान परिवार में जन्मी हेमलता त्यागी आज एडीजे हैं। उन्होंने न्यायिक अधिकारी बनने की कहानी बताई। कहा- मैंने गांव में पशुओं का गोबर उठाया है, चारा काटा है, खेत से चारा लाती थी। इसलिए न्यायिक अधिकारी बनने के बाद जब घर पर नौकर नहीं आता, तो भी काम करने से परहेज नहीं किया। साल 2010 में गांव में कुछ लोगों ने हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया, जबरन पेड़ काट दिए। परिवार की यह स्थिति ऐसी नहीं थी कि दबंग परिवारों से बराबरी कर सके। गांव के उस परिवार का रसूख इतना था कि SDM ने फोर्स भेजकर भाई और पापा को उठवा लिया।

मैं भी वहां पहुंची, तो देखा तो SDM पापा रोहताश त्यागी और भाई मुलेश को धमका रहे थे। तभी फैसला किया कि जज बनना है, ताकि किसी कमजोर के साथ कोई दबंग अपने पावर और पैसों के बल पर अत्याचार न कर सके। साल 2013 में पहली बार प्री परीक्षा पास की, तो मनोबल बढ़ता चला गया। जो बनी हैं महिलाओं की आदर्श, आज ADJ बनने के बाद यही कोशिश रहती है कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होने दूं।

रितू के एसडीएम बनने की कहानी..

पापा चले गए, पर बेटी ने नहीं मानी हार

खाप पंचायतों के गढ़ मुजफ्फरनगर के गांव महाबलीपुर की रितु चौधरी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। यह गांव चरथावल तहसील क्षेत्र में आता है। जहां एक समय लड़कियों को पढ़ने के लिए बाहर नहीं भेजा जाता था। रितु चौधरी ने बताया कि वह 2019 बैच की PCS हैं। अमेठी जिले में डिप्टी कलेक्टर के पद पर हूं। पिता वेदपाल सिंह किसान थे। पांचवी तक की पढ़ाई गांव के स्कूल से हुई। चरथावल में कक्षा छह से 12वीं तक की पढ़ाई की। चार किमी दूर पढ़ने पैदल जाना होता था। साल 2017 में जब मेंस की तैयारी चल रही, तभी पापा दुनिया से चले गए। एक तरफ मम्मी और भाई पर परिवार की जिम्मेदारी आ पड़ी, तो दूसरी तरफ मेरे सामने लक्ष्य पाना मुश्किल हो चला था। पापा की मौत के बाद एक बार लगा की हार जाऊंगी। दोनों भाई भरत सिंह, रविंद्र सिंह और मम्मी विमला ने हारने नहीं दिया।

शिक्षिका पुष्पा यादव की कहानी..

अफसर बनने से ज्यादा बच्चों का भविष्य सुधारने का रास्ता चुना

बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में जब आदर्श विद्यालयों का नाम लिया जाता है, तो मेरठ के रजपुरा प्राथमिक विद्यालय का नाम कुछ वर्षों में सबसे ऊपर ही रहा है। इस विद्यालय की प्रधान अध्यापिका पुष्पा यादव का यह स्कूल 2019 में प्रदेश में टॉप 5 पर सलेक्ट हो चुका है। यह वह शिक्षिका हैं, जिन्होंने निजी पैसे लगाकर इस स्कूल की न सिर्फ तस्वीर बदली है, बल्कि छात्रों को पढ़ाने के लिए घर घर जाकर दाखिले भी किए।मेरठ के मवी मटौरा गांव की रहने वाली पुष्पा यादव ने बताया कि पिता राजेंद्र यादव मोदी फैक्टरी में रहे हैं। छोटे भाई प्रदीप यादव डिप्टी CMO हैं तो बड़े भाई संदीप यादव की लैब है। मैंने तीन विषयों में MA के अलावा LLB भी किया। मेरे लिए अफसर बनना मुश्किल नहीं था। तैयारी करते हुए ही सोचा था कि मुझे शिक्षिका बनना है, ताकि गरीब बच्चों का भविष्य सुधार सकूं।

 DSP प्रीति सिंह की कहानी..

पापा चाहते थे कि बेटी कुछ बने

2010 बैच की PPS अफसर प्रीति सिंह मेरठ में LIU में DSP हैं। मूलत: अमरोहा जिले की रहने वाली प्रीति सिंह ने बताया कि पिता आगरा में भूमि संरक्षण विभाग में तैनात रहे हैं। मेरी पढ़ाई आगरा में हुई। Msc पास करने के बाद सिविल परीक्षा की तैयारी की। प्रीति कहती हैं कि पापा हमेशा कहते थे कि बेटी कुछ बने। मैं भी सोचती थी की लड़कियों को आत्मनिर्भर होना चाहिए। @Back To Home

 

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By editor1

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