कान्हा की नगरी में होली की धूम

कान्हा की नगरी में होली की धूम, राधा-कृष्ण के अन्नय प्रेम के गवाह पूरे ब्रज मंडल में इन दिनों होली की धूम है। जहां तक नजर जाती है रंगों से सराबोर लोग नजर आते हैं। वृंदावन बांके बिहारी के धाम की बात करें या फिर राधा रानी की नगरी के रूप में पहचान रखने वाले बरसाने की बात की जाए हर ओर रंगोत्सव है। इस रंगोत्सव में हर कोई खुद को रंगना चाहता है। शारीरिक और मानसिक रूप से सभी कान्हा की नगरी में रंगोत्सव का आनंद ले रहे हैं। तमाम मंदिरों में बुधवार को रंगोत्सव की अद्भूुत छटा नजर आयी। वृंदावन की यदि बात की जाए तो ऐसा लगता था कि बांके बिहारी के इस धाम में पूरी दुनिया सिमट जाना चाहती है। केवल भारतीय ही नहीं विदेशी भी यहां बांके बिहारी की नगरी में आकर रंगाेत्सव का हिस्सा बने हैं। वृंदावन के इस्कान मंदिर में होली व रंगोत्सव की अलग ही छटा है। इसी प्रकार की छटा प्रेम मंदिर व यहां के दूसरे मंदिरों में भी नजर आती है। राधे राधे की गूंज चहुं ओर सुनाई देती है। गोकुल की यदि बात की जाए तो जहां की कुंज गलियों में कान्हा घूमते थे।इसी गोकुल में जब छड़ीमार होली खेली गई, तो द्वापरयुग जीवंत हो उठा। गोकुल का कण-कण भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। हुरियारिनों ने हुरियारों को छड़ी मारी तो श्रद्धालु भी आनंद के सागर में गोते लगाने लगे।कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने पहली होली गोकुल में ही खेली थी। भगवान का बाल स्वरूप होने के कारण गोकुल में छड़ीमार होली होती है, ताकि कान्हा को वह लगे नहीं। मंगलवार को गोकुल की गलियों में सुबह से ही आस्था का रंग बरसने लगा। वक्त बीतने के साथ नंदभवन नंद किला मंदिर में आस्था का रंग गाढ़ा होता गया। बैंडबाजों की धुन पर श्रद्धालु झूमते रहे। मुरलीधर घाट पर पहुंचने के लिए भगवान का डोला सजाया गया। ठाकुरजी की आरती मथुरादास, बिट्ठल शर्मा ने की। मंदिर से जैसे ही डोला भगवान श्रीकृष्ण-बलराम के स्वरूप के साथ मुरलीधर घाट की ओर बढ़ा, मानो तीनों लोकों की मस्ती गोकुल में सिमट गई। श्रद्धा के फूलों से गलियां महक उठीं। ठाकुरजी फूलों की होली खेलते हुए मुरलीधर घाट की ओर बढ़ रहे थे। घोड़ों पर चल रहे द्वारपाल भगवान के आने का संकेत दे रहे थे। मुरलीधर घाट पर छड़ीमार होली शुरू हुई तो मस्ती की थाह नहीं रही। अबीर-गुलाल के बदरा छा गए। सोलह श्रृंगार किए हुरियारिनें जिधर छड़ी चलातीं, उधर भगदड़ मच जाती। प्रेम पगी छड़ियां खाकर हुरियारे भी निहाल हो गए। श्रद्धालुओं को भी इस नयनाभिराम होली में परमानंद मिला। मुरलीधर घाट पर छड़ीमार होली का रंग जम गया। यहां से ठाकुरजी का डोला अबीर-गुलाल की होली खेलते हुए मंदिर की ओर बढ़ा। ठाकुरजी के मार्ग में अबीर-गुलाल के बदरा छा गए। ठाकुरजी की जय-जयकार ने वातावरण में श्रद्धा का रंग भर दिया। श्रद्धालुओं ने एक -दूसरे पर रंग भी डाला। मंदिर पहुंचने पर छड़ीमार होली का समापन संध्या आरती से हुआ। हुरियारिनों को फगुआ दिया गया। @Back To Home

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By editor1

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