मंडरा रहा है लॉक डाउन का खतरा

मंडरा रहा है लॉक डाउन का खतरा,राजधानी दिल्ली में कोरोना महामारी बेकाबू होने से लोगों में दहशत का माहौल है। सोमवार को कोरोना के 4000 से अधिक नए केस मिलने के बाद यहां संक्रमित मरीजों का कुल आंकड़ा बढ़कर 14.58 लाख के पार पहुंच गया है। इसके साथी ही  दिल्ली में लॉकडाउन लगने की संभावनाएं जोर पकड़ने लगी हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो यदि चौथी लहर आती है तो उसके लिए हम खुद जिम्मेदार हैं। आईएमए यूपी के अध्यक्ष डा. एमके बंसल का कहना है कि चौथी लहर को भारतीयों की लापरवाही न्यौता दे रही है। ऐसाउ ही कुछ तीसरी लहर में भी हुआ था। भारत में तीसरी लहर आनी नहीं चाहिए थी, लेकिन तीसरी लहर को खुद हमारी लापरवाही ने न्यौता दिया था। गनीमत यह रही कि तीसरी लहर का वायरस इतना अधिक घातक नहीं था। इसके अलावा ज्यादातर लोग वैक्सीनेशन भी करा चुके थे, जिसकी वजह से तीसरी लहर से इतना बड़ा नुकसान नहीं उठाना पड़ा जितना बड़ा नुकसान पहली व दूसरी लहर में उठाया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने बताया कि चौथी लहर को लेकर भी हालात तीसरी लहर पूर्व सरीखे बन रहे हैं। सरकारी स्तर पर इसको लेकर सख्ती किए जाने की बे इंतजहा जरूरत है जो किया नहीं जा रहा है। लोगों की लापरवाही तीसरी लहर को बार-बार दावत दे रही है। वहीं दूसरी ओर  देश में कोराना की चौथी लहर आने की आशंकाओं के बीच बीते 24 घंटे में कुल 67 कोविड मरीजों की जान कारोना वायरस ने ले ली। जबकि अलग-अलग राज्‍यों में कुल 1938 पॉजिटिव केस की पहचान की गई है। इनमें कई लोग Omicron+ Delta BA.2 वेरिएंट के शिकार बने हैं। जानकारों के मुताबिक कोरोना का नया सब वेरिएंट तेजी से फैलाव वाला वायरस है। यह फेफड़ा की बजाय गला को जाम कर देता है। इससे सांस की नली और उपरी श्‍वसन प्रणाली बुरी तरह प्रभावित होती है। कोरोना की चौथी लहर का मुख्‍य कारक माना जा रहा सब वेरिएंट BA.2 ओमिक्रॉन और डेल्‍टा वेरिएंट के मेल से बना है। यह पहले के वायरस के मुकाबले अधिक संक्रामक है, और तेजी से फैलता है। कोरोना वायरस का बेहद असरदार वेरिएंट माना जा रहा BA.2 का प्रसार मुख्‍य रूप से श्वसन प्रणाली में कई गुना अधिक होता है। इसके शुरुआती लक्षण फेफड़ों से संबंधित नहीं हैं। BA.2 वेरिएंट के दो विशिष्ट लक्षण सामने आए हैं। जिसमें चक्कर आना और थकान होना शामिल हैं। ओमिक्रॉन+डेल्‍टा बीए.2 वायरस से संक्रमित होने के दो से तीन दिनों के भीतर इसके दोनों लक्षण प्रकट हो सकते हैं और संक्रमित मरीजों में पहले के मुकाबले अधिक समय तक रह सकते हैं। @Back To Home

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By editor1

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