मुश्किल में फंस सकते हैं सीईओ कैंट

मुश्किल में फंस सकते हैं सीईओ कैंट, डोर टू डोर कूडा उठाने के ठेके में कथित वित्तीय अनियमितताओं के चलते सीईओ कैंट नागेन्द्र नाथ विभागीय जांच में फंस सकते हैं। कैंट प्रशासन पर पूरे मामले में सरकारी खजाने से डोर टू डोर ठेकेदार को भुगतान कराए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह आरोप किसी अन्य ने नहीं बल्कि कैंट बोर्ड के सेनेट्री सेक्शन के इंस्पेक्टर योगेश यादव ने लगाए हैं। मुश्किल में फंस सकते हैं सीईओ कैंट, जानकारों की मानें तो यह दूसरा मौका है जब नागेन्द्र नाथ के सेवाकाल में उन्हें इस प्रकार की मुसीबत सामना करना पड़ सकता है। इससे पहले भी कुछ मिलती जुलता घटनाक्रम उनके साथ हो चुका है, जिसमें सीबीआई ने कार्रवाई की थी। नागेन्द्र नाथ का मेरठ से बतौर डायरेक्टर पूना कैंट में तवादला हो गया है, हालांकि वह इतनी दूर पोस्टिग/प्रमोशन पर जाना नहीं चाहते थे। सुनने में आया है कि वह सैट्रल कमान में इच्छुक थे। क्याेंकि साल 2024 में उनका रिटायर्मेंट तय है, इसलिए प्रयास यही था कि दूर न जाए जाए। यह बात तो हुई उनके रिटायर्मेंट की। लेकिन बड़ा धमाका कैंट बोर्ड में सोमवार को हुआ। इस धमाके से कैंट बार्ड की दीवारे हिल गयी हैं। साथ ही यह भी साफ हो गया है कि सेना के सरोकारों से सीधे जुडाव रखने वाले कैंट बाेर्ड के कुछ अफसर भी भ्रष्ट्रचार के दलदल में आंकठ डूबे हैं। यह आरोप हम नहीं लगा रहे बल्कि कैंट बोर्ड के सेनेट्री सेक्शन के इंस्पेक्टर ने लगाए हैं। इंस्पेक्टर योगेश यादव एक पूर्व मैंबर की स्कूटी पर सवाल होकर सुबह सब एरिया मुख्यालय पहुंचे। वहां पर उन्होंने ब्रिगेडियर को दिए एक पत्र में कैंट बोर्ड के डोर टू डोर ठेके को लेकर कैंट बोर्ड प्रशासन पर पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच कराए जाने की मांग की है। इतना ही नहीं उन्होंने एक पत्र कैंट बोर्ड में पब्लिक के प्रतिनििध सतीश त्यागी को भी दिया है। सतीश त्यागी ने योगेश यादव द्वारा पूरे मामले की जांच को दिए गए पत्र की प्रतिलिपि इस मीडिया कर्मी को भी भेजी है। इस पत्र में  बेइंतहा गंभीर आरोप ही नहीं लगाए गए हैं बल्कि पत्र में कहा गया है कि आरोपों के संबंध में ठोस साक्ष्य भी मौजूद हैं। योगेश यादव ने भ्रष्टाचार के इस खेल की शिकायत पूर्व में भी सीईओ कैंट से भी किए जाने की बात कही है। वहीं दूसरी ओर सतीश शर्मा ने बताया कि यह मामला बेहद गंभीर है। इस मामले में उन्होंने एक पत्र ब्रिगेडियर को लिखा है, जिसमें उन्होंने आरोपों से संबंधित समस्त फाइले सेना द्वारा कब्जे में लिए जाने का आग्रह किया है ताकि साक्ष्य नष्ट न किए जा सकें। इस पूरे मामले में सीईओ कैंट का पक्ष जानने का भी प्रयास किया गया, कैंट बोर्ड में काल की तो वहां से बताया गया कि साहव आफिस में नहीं है। जिस कारण नागेन्द्र नाथ का पक्ष नहीं शामिल किया जा रहा है। आरोपों की प्रति कैंट बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष को भी दी गयी है। @Back To Home

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By editor1

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