नाराजगी वोट में नहीं बदल सका विपक्ष

नाराजगी वोट में नहीं बदल सका विपक्ष, किसान आंदोलन, महंगाई, हाथरस व पीलीभीत कांड सरीखे प्रकरणों को लेकर आज जन की नाराजगी को विपक्ष वोट में नहीं बदल सका। इन मुददों को कैश नहीं कराया जा सका। माना जा रहा था कि कृषि कानून और सीएए विरोधी आंदोलन के साथ ही छुट्टा पशुओं की समस्या, हाथरस कांड और लखीमपुर खीरी कांड को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी मुद्दा बनाने वाले विपक्ष के सामने भाजपा को असहज स्थिति का सामना करना पड़ेगा, हालांकि ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। अपने विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाकर जनता के बीच उतरी भारतीय जनता पार्टी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी शानदार कामयाबी मिली है। यहां तक कि भाजपा को उस जाट समाज का वोट भी झूमकर मिला, विपक्षी दलों द्वारा जिस बारे में भ्रम फैलाया जा रहा था कि वो भाजपा से नाराज हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, आगरा, अलीगढ़ और बरेली मंडलों के 26 जिलों की 136 विधानसभा सीटों पर सन 2017 के चुनाव में भाजपा ने 109 सीटों पर विजय हासिल की थी जबकि सपा के खाते में 21 सीटें गई थीं।पश्चिमी उप्र में चुनाव की घोषणा के बाद कई मुद्दे थे। नाराजगी वोट में नहीं बदल सका विपक्ष, इनमें कृषि कानून के विरोध में चले आंदोलन को विपक्ष ने खूब हवा देने की कोशिश की थी। गाजीपुर बार्डर पर इस आंदोलन का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत कर रहे थे। रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी और सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी अपने चुनाव प्रचार में भाजपा पर किसान हितों की अनदेखी का बार-बार आरोप लगाया था। इसके अलावा गन्ना बकाया, महंगाई और बेरोजगारी का भी राग छेड़ा गया। हालांकि, बाद के दिनों में यह सभी मुद्दे पीछे होते गए और इनकी जगह ले ली कानून व्यवस्था ने। भाजपा नेताओं के भाषण में विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ ही कैराना पलायन से लेकर कवाल कांड और दंगों से लेकर सोतीगंज तक की चर्चा स्थायी भाव में बनी रही। यह सभी मसले सीधे तौर पर कानून व्यवस्था से जुड़े हुए थे। अंतत: चुनाव परिणाम से यह स्पष्ट हुआ कि कृषि कानून का मुद्दा कारगर नहीं रहा और अधिकांश जगहों पर जनता ने भाजपाराज में हुए विकास और बेहतर रही कानून व्यवस्था को ही सामने रखकर मतदान किया। @Back To Home

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By editor1

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