नवाब के बाद कोठी का जलवा भी खत्म

नवाब के बाद कोठी का जलवा भी खत्म, एक दौर था जब बागपत के नवाबों का सियासत में गजब का जलवा होता था, लेकिन अब ऐसा नहीं। हवेली के लिए अहमद हमीद की हार बड़ा झटका है। यूं लगातार तीन बार से विधानसभा चुनाव में मिल रही हार से लगता है कि हवेली की सियासी चमक फीकी पड़ गई है। नवाब के बाद कोठी का जलवा भी खत्म, बागपत के नवाब परिवार का विधानसभा चुनाव की सियासत से छह दशक पुराना नाता है। साल 1962 में नवाब स्व. शौकत हमीद विधायक चुने गए थे। फिर उनके बेटे नवाब कोकब हमीद 1985 से पहली बार विधायक बने और 2007 तक पांच बार चुने गए। एनडी तिवारी, मुलायम ङ्क्षसह यादव और मायावती की सरकार में चार बार स्व. कोकब हमीद मंत्री रहे थे, लेकिन वर्ष 2012 में बागपत विधानसभा चुनाव हारने से झटका लगा।

स्व. कोकब हमीद को बसपा की हेमलता चौधरी ने पराजित किया था। उनके बेटे अहमद हमीद को बसपा उम्मीदवार के रूप में साल 2017 में भाजपा के योगेश धामा ने पराजित किया। अब साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के योगेश धामा से अहमद हमीद को हार का मुंह देखना पड़ा। पिता और पुत्र की लगातार तीन बार से होती हार को देखकर कुछ यही लगता है कि अब नवाबों की हवेली का चुनावी सियासत में वो जलवा नहीं रहा जो कभी पहले हुआ करता था। वहीं नवाब अहमद हमीद की बागपत विधानसभा सीट से हार होने से रालोद में खलबली मची है। रालोद के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को बातों ही बातों में कहते सुना गया कि अहमद हमीद का हारना बहुत गलत हुआ है। इसका असर लोकसभाचुनाव 2024 पर पड़ सकता है। बेशक चुनाव हार गए हों लेकिन नवाब परिवार का समाज में अपना मान सम्मान कम नहीं है। @Back To Home

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By editor1

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