रेजिमेंट को प्रदान किया निशान, डाेगरा रजिमेंट के समारोह में अयोध्या पहुंचे थल सेना अध्यक्ष मुकुंद नरवणे ने रेजिमेंट को निशान प्रदान किया। थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा है कि भारतीय सेना सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और हम हर संभावित चुनौती के लिए तैयार हैं। नए हथियार और आधुनिक उपकरणों से सेना की क्षमता में निरंतर वृद्धि हो रही है। हालांकि यह सतत प्रक्रिया है, लेकिन इस प्रक्रिया में बीते दो-तीन वर्ष के दौरान नई तीव्रता आई है। वह डोगरा रेजिमेंट के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विचार व्यक्त कर रहे थे। रेजिमेंट के जमेदार लाला परेड ग्राउंड में परेड की सलामी लेने और रेजिमेंट को निशान प्रदान करने के बाद सैन्य अधिकारियों एवं सैनिकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, डोगरा रेजिंमेंट का इतिहास पराक्रम से भरा है और आजादी के पूर्व एवं बाद के प्रत्येक युद्ध में इस रेजिमेंट ने शौर्य-साहस का उदाहरण पेश किया है। सेना प्रमुख ने कहा, इस स्वर्णिम इतिहास का श्रेय उन वीरों को है, जिन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान देकर तिरंगे पर आंच नहीं आने दी और देश उन्हें कभी भुला नहीं सकता। उन्होंने कहा, डोगरा रेजिमेंट की गौरव-गाथा, युद्ध कौशल अनेक बैटिल आनर, गैलेंट्री अवार्ड अपूर्व रण-कौशल और अदम्य साहस का प्रतीक है। जनरल नरवणे ने डोगरा रेजिमेंटल सेंटर की ट्रेनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रति संतुष्टि जताते हुए कहा, देश सुरक्षित है, क्योंकि सीमाओं की रक्षा के लिए आप जैसे वीर हैं। समारोह में सेवानिवृत्त थल सेना प्रमुख निर्मलचंद्र बिज, लेफ्टीनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी, लेफ्टीनेंट जनरल जय सिंह जैन, कमांड आफिसर ब्रिगेडियर जेकेएस विर्क आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

सामरिक सफलता के प्रतिमान गढ़े : डोगरा रेजिमेंट की स्थापना 1922 में ब्रिटिश शासन के ही दौरान हुई। देश की स्वतंत्रता के बाद भी यह रेजीमेंट न केवल बराकरार रही, बल्कि सामरिक सफलता के अनेक प्रतिमान गढ़े। इस दौरान रेजीमेंट को 117 युद्ध सम्मानों से सम्मानित किया गया है, जिसमें एक अशोक चक्र, नौ महावीर चक्र, 11 कीर्ति चक्र, 58 शौर्य चक्र और 39 वीर चक्र शामिल हैं।

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By editor1

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