सांंप्रदायिक हिंसा पर पीएम की चुप्पी पर सवाल,  विपक्ष के तेरह नेताओं ने  हालिया सांप्रदायिक हिंसा और घृणापूर्ण भाषण संबंधी घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता जतायी और लोगों से शांति एवं सद्भाव बनाए रखने की अपील की. विपक्षी नेताओं ने इन मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘चुप्पी’ पर भी सवाल उठाया. संयुक्त बयान में  विपक्षी दलों ने कहा है कि वे क्षुब्ध हैं कि भोजन, वेशभूषा, आस्था, त्योहारों और भाषा जैसे मुद्दों का इस्तेमाल सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा समाज का ध्रुवीकरण करने के लिए किया जा रहा है. यह बयान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत 13 नेताओं द्वारा जारी किया गया है. संयुक्त बयान में विपक्ष के नेताओं ने कहा, ‘हम प्रधानमंत्री की चुप्पी को लेकर स्तब्ध हैं जो कि ऐसे लोगों के खिलाफ कुछ भी बोलने में नाकाम रहे, जो अपने शब्दों और कृत्यों से कट्टरता फैलाने और समाज को भड़काने का काम कर रहे हैं. यह चुप्पी इस बात का तथ्यात्मक प्रमाण है कि इस तरह की निजी सशस्त्र भीड़ को आधिकारिक संरक्षण प्राप्त है.’ गौरतलब है कि 10 अप्रैल को रामनवमी के अवसर पर देश के कुछ हिस्सों से सांप्रदायिक हिंसा की खबरें सामने आई थीं. बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष शरद पवार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके के अध्यक्ष एमके स्टालिन, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी, झारखंड के मुख्यमंत्री और झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, राजद के अध्यक्ष तेजस्वी यादव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी. राजा, अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक के महासचिव देवव्रत विश्वास, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के महासचिव मनोज भट्टाचार्य, आईयूएमएल के महासचिव पीके कुन्हालीकुट्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एमएल)-लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने हस्ताक्षर किए.

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By editor1

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