सांसों पर धुल व धुंए का बैरियर, शहर इन दिनों शहरवासी धूल और कूड़े के धुएं की गिरफ्त में हैं। शहर में कहीं निर्माण कार्य की वजह से तो कहीं सड़क में गड्ढों की वजह से धूल ही धूल नजर आती है। कहीं खुले में रेत और सीमेंट ले जाया जा रहा है तो कहीं सूखे कूड़े के कण उड़ रहे हैं। कूड़ा समय से उठ नहीं पा रहा, इसलिए उसे आग लगाई जा रही है। सुबह-शाम के समय स्थिति बेहद खराब हो जाती है। नूरनगर रोड, शताब्दीनगर, दिल्ली रोड, ट्रांसपोर्ट नगर, बागपत रोड, गढ़ रोड, हापुड़ रोड आदि स्थानों पर दिन-रात धूल उड़ती रहती है। साथ ही कूड़े में आग भी लगाई जा रही है।दिल्ली रोड पर रैपिड रेल कारिडोर निर्माण के चलते धूल भी काफी उड़ रही है, लेकिन एनसीआरटीसी के निर्देश पर समय-समय पर पानी का छिड़काव किया जाता है। हालांकि पानी का यह छिड़काव पर्याप्त नहीं है। गर्मी अधिक होने से छिड़काव का असर कुछ ही मिनट तक रहता है। राष्ट्रीय हरित अभिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार जिले में कुल 31 विभागों को वायु प्रदूषण पर नियंत्रण की जिम्मेदारी दी गई थी। नगर निगम को शहरी क्षेत्र में कूड़ा जलाने वाले मुख्य स्थानों का चयन करने व कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन तीन सप्ताह बीतने के बाद भी न सूची तैयार हुई, न ही कंट्रोल रूम शुरू किया जा सका है।इ जिले में लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। कई बार बैठक होने व दिशा-निर्देश जारी करने के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। मेरठ में वायू प्रदूषण की स्थिति अप्रैल में ही खराब है। गंगा नगर में जहां वायू प्रदूषण का स्तर 231 एक्यूआई रहा। जयभीमनगर में वायू प्रदूषण 235 एक्यूआई रहा। जबकि सबसे अधिक पल्लवपुरम में वायू प्रदूषण 283 एक्यूआई के स्तर पर रहा। वायु प्रदूषण रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया। नगर निगम को कूड़ा जलाने से रोकने और 15 दिन में सूची तैयार करने के लिए कहा गया। अभी तक सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया जाएगा।

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By editor1

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